फैज़ के नाम

The poem alternates with the nazm “Mujhse pehli si mohobbat” by Faiz Ahmed Faiz.

 

 

मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग
मैं ने समझा था कि तू है तो दरख़्शाँ है हयात
तेरा ग़म है तो ग़म-ए-दहर का झगड़ा क्या है

***

मिलते थे पहले
मोहब्बत के प्यालों में
तुम और तुम्हारा ग़म
प्याले लेकर फिरती हूँ अब न जाने कितने
न तुम मिले न ग़म मिला
प्याले से मोहब्बत का रंग भी उतर चला

***

तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए
यूँ न था मैं ने फ़कत चाहा था यूँ हो जाए

***

रहते गर हम उस जहान में
जहाँ लालटेन की लौ बुझ जाए
तो तारों में देख लेते मोहब्बतों को
हिज्र की सुरत के आगे

***

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

***

पर यहाँ इस स्ट्रीट लैम्प की मरम्मत कौन करे
वस्ल की राहत के तारें कौन गिने
लौ बुझती है जलने से पहले
मोहब्बत की कीमत यहाँ कौन तय करे

***

अन-गिनत सदियों के तारीक बहीमाना तिलिस्म
रेशम ओ अतसल ओ किम-ख़ाब में बुनवाए हुए
जा-ब-जा बिकते हुए कूचा-ओ-बाज़ार में जिस्म
ख़ाक में लुथड़े हुए ख़ून में नहलाए हुए

***

बाज़ारों में फिरते है यहाँ सब प्यालें लेकर
रेशम ओ अतसल पर अब रंग नहीं चढ़ते
तुम मिलते तो शायद देखते
बेरंग प्यालों के ग़म ढलते

***

जिस्म निकले हुए अमराज़ के तन्नूरों से
पीप बहती हुई गलते हुए नासूरों से
लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तिरा हुस्न मगर क्या कीजे

***

वहाँ रहते तो समझते
आफ़्ताब से बेहतर नहीं है चाँदनी
बरबाद तो किया हमें तारों ने
क्या कीजे, याद फिर आता है वो जहान
जिसे कभी देखा ही नहीं

***

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग

***

वस्ल की राहत गिरवी रक्खी है उस बाज़ार में
तेरे ग़म-ए-तिलिस्म के बदले
मुझ से पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब ना माँग
दरख़्शाँ है हयात, तूने दी है बहारों को सबात
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे

 

 

Advertisements

Leave a comment

Filed under Uncategorized

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s