पुराने घरो के दरवाज़े

locked door

 

पुराने घरो के दरवाज़े इतने खूबसूरत क्यू लगते है?
उन पर लगे वो पुराने ताले
वो पुराने खटखटाने वाले डोरबेल्स
उन बंद दरवाज़ो के पीछे, वक़्त भी शायद अरसे से नही गुज़रा

वो दरवाज़े भी क्या बात करते है आपस में?
चौखट पर तो अब जाते-जाते कोई बातें नही करता
ना ही रात को दहलीज़ लांगकर कोई
चुप-चाप कमरे में दौड़ जाता है

अब बचा ही कौन है?
बरसात भी अब घर को छलनी कर जाती है
पहले तो सिर्फ़ लीकेज होती थी

उन बंद दरवाज़ो की सीडियो पर बैठकर
कोई बा स्वेटर नही बुनता
किसिका इंतेज़ार नही करती है बंद खिड़कियाँ

पर उस खटखटाने वाले डोरबेल को बजाओ
तो अब भी लगता है
जैसे उस घर में कोई रहता है
उन सीडियो पर बैठकर
जीवन जैसे छोटी लगने लगती है

उस ताले को हवा ही शायद तोड़ दे किसी दिन

Advertisements

Leave a comment

Filed under Uncategorized

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s