ताबीर

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उस रोज़ जो उनको देखा है अब ख्वाब का आलम लगता है
उस रोज़ जो उनसे बात हुई वो बात भी थी अफसाना क्या  (1)

गीत सुना है कभी?                                                                                                                                                नहीं, मेटल रॉक नहीं
बोलीवूद, जॅज़ या पोप भी नहीं
गीत नहीं समझते?
सुर ताल नहीं, कुछ और
रूह?
या शायद तुम खुद ही

गीत

पानी पर जैसे चलते ना जाने कौन-कौन
एक भीड़ सी जमती है
जीवन में, जीवन के लिए

ekhon gangar teere ghumonto darale
chitkath daake- aaye aaye (2)

 

इतनी जल्दी भी क्या है?
एक अफ़साना ख्वाब में देखा
एक ख्वाब अफ़साना है

कभी-कभी
यों हो जाता है
गीत कहीं कोई गाता है
गूँज किसी
उर में उठती है  (3)

धीमी सी है चाँदनी
ल़हेर उठती है तेज़ी से
अंधों की दुनिया में भी
छवि वही बनाती हूँ
रंग तुम्हारे मिल जाते है

गीत
धीरे चलो
जाना कहा है?
इस घर के बाद भी यही घर है
इस चोट के बाद फिर यही चोट
सुनो ज़रा

गीत

बहती हूँ
या तुम तक जाती हूँ
इत्तफाक
खुमार इस पल के पहले पल का
तुम तक
बस, तुम तक

गीत
बह जाती है

 

(1) इंशा जी उठो, इब्ने इंशा (http://www.anubhuti-hindi.org/anjuman/ibneinsha.htm)

(2) jete paari kintu keno jaabo, Shakti Chattopdhyay (https://priyokobita.wordpress.com/tag/jete-pari-kintu-keno-jabo/)                                       Roughly translated into Hindi it is:                                                                                                             अब नींद में गंगा के धार पर जब खड़ा होता हूँ,
चीता पुकारती है: आओ-आओ

(3)   परिचय की वो गाँठ, त्रिलोचन   ( http://www.anubhuti-hindi.org/gauravgram/trilochan/parichay.htm)

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